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केरल के एक स्कूल में अब शिक्षक को सर या मैडम के बदले टीचर कहने का निर्देश

08 Jan, 2022 684

संवाददाता/in24 न्यूज़.
अमूमन विद्यार्थी शिक्षकों को सर या मैडम के नाम से संबोधित करते हैं, मगर केरल के पलक्कड़ जिले के एक स्कूल ने अपने विद्यार्थियों को निर्देश दिया है अब उन्हें सिर्फ टीचर कहकर संबोधित करें। बता दें कि पलक्कड़ जिले के ओलास्सेरी गांव में स्थित सरकारी सहायता प्राप्त सीनियर बेसिक स्कूल जेंडर इक्वलिटी लाने वाला राज्य का पहला स्कूल बन गया है। स्कूल में छात्रों की संख्या 300 है। यहां नौ महिला शिक्षक और आठ पुरुष शिक्षक हैं। स्कूल के प्रधानाध्यापक वेणुगोपालन एच के मुताबिक, ऐसा करने का विचार सबसे पहले एक पुरुष स्टाफ सदस्य को आया था। उन्होंने कहा कि हमारे स्टाफ सदस्यों में से एक संजीव कुमार वी ने पुरुष शिक्षकों को सर कहने की पुरानी प्रथा को खत्म करने का विचार सामने पेश किया। वह पलक्कड़ स्थित सामाजिक कार्यकर्ता बोबन मट्टुमंथा द्वारा शुरू किए गए एक अभियान से प्रेरित थे। बोबन मट्टुमंथा ने सरकारी अधिकारियों को सर या मैडम के रूप में संबोधित करने की प्रथा को दूर करने के लिए सरकार से संपर्क किया था। मट्टुमंथा ने कहा कि स्कूलों में भी इसी तरह के बदलाव होने चाहिए। खबर के मुताबिक, प्रधानाध्यापक ने कहा कि इसी तरह के बदलाव स्कूल से दूर एक पंचायत द्वारा भी किए जा रहे हैं। माथुर पंचायत ने पिछले साल जुलाई में सर और मैडम की प्रथा को खत्म करने का फैसला लिया था। इस गवर्निंग बॉडी ने पंचायत कर्मचारियों को उनके पदनाम से संबोधित करने का निर्देश दिया था। वेणुगोपालन ने कहा कि पंचायत के फैसले ने भी स्कूल को काफी प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि हमने सोचा कि क्यों न हम टीचर्स को संबोधित करने में जेंडर इक्वलिटी लाने की कोशिश करें और स्कूल में बदलाव लाए। इस कदम का अभिभावकों ने भी स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि हमने छात्रों से कहा है कि वे सभी शिक्षकों पुरुष और महिला दोनों को टीचर कहकर संबोधित करें। पहले इस कदम का काफी विरोध हुआ हालांकि धीरे-धीरे छात्रों ने शिक्षकों को टीचर कहना शुरू कर दिया। अब कोई भी छात्र पुरुष शिक्षक को सर या महिला को मैडम कहकर नहीं पुकारता। प्रधानाध्यापक ने कहा कि सर और मैडम शब्द जेंडर इक्वलिटी के खिलाफ हैं। शिक्षकों को उनके पदनाम से संबोधित किया जाना चाहिए, न कि उनके जेंडर से। शिक्षकों को संबोधित करने का नया तरीका छात्रों में जेंडर इक्वलिटी को लेकर जागरूकता लाने में मदद करेगा। सर शब्द औपनिवेशिक काल की याद दिलाता है, इसलिए इस प्रथा को दूर किया जाना चाहिए।

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