निर्भया के वकील ने फांसी टालने के लिए कोरोना का बनाया बहाना
संवाददाता/in24 न्यूज़.
कोरोना वायरस के खौफ का फायदा निर्भया केस के दोषियों के वकील भी उठाना चाहते हैं. बता दें कि निर्भया के दोषियों को 20 मार्च को फांसी दी जाएगी। फांसी से पहले चारों गुनहगारों के वकील एपी सिंह ने एक बेतुका तर्क दिया है। एपी सिंह फांसी रुकवाने के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं। अब उन्होंने दरिंदों की फांसी को कोरोना वायरस से जोड़कर पेश किया है। एक न्यूज चैनल से बात करते हुए वकील एपी सिंह ने कहा कि अगर चारों की फांसी रुक जाएगी तो क्या विश्वयुद्ध छिड़ जाएगा। कोरोना वायरस तो ऐसे ही फैल चुका है, क्यों जीवन ले रहे हो। जीवन लेने से जीवन देने वाला बड़ा होता है। इसलिए मेरे साथ इस देश में बहुत से लोग हैं जो चाह रहे हैं कि फांसी ना हो। निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले में फांसी की सजा पाए चार दोषियों में से एक विनय शर्मा ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर दावा किया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा उसकी दया याचिका खारिज किए जाने में प्रक्रियागत खामियां और संवैधानिक अनियमितताएं थीं। विनय शर्मा की तरफ से याचिका उसके वकील एपी सिंह ने दायर की, जिन्होंने कहा कि मामले को दिल्ली उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में दायर किया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि दया याचिका खारिज करने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजी गई अनुशंसा में दिल्ली के गृह मंत्री सत्येन्द्र जैन के हस्ताक्षर नहीं हैं। विनय की दया याचिका राष्ट्रपति ने एक फरवरी को खारिज कर दी थी। याचिका के मुताबिक मामले को जब उच्चतम न्यायालय के समक्ष उठाया गया तो केंद्र ने कहा था कि जैन का हस्ताक्षर व्हाट्सएप पर ले लिया गया था। इसने दावा किया कि जब दया याचिका दायर की गई थी उस समय चुनाव आदर्श आचार संहिता लागू थी और जैन उस वक्त केवल विधायक उम्मीदवार थे क्योंकि चुनावों की घोषणा हो चुकी थी और इसलिए वह गृह मंत्री की शक्ति का इस्तेमाल नहीं कर सके।