Gaza Ceasefire Resolution :गाजा सीजफायर मामले को लेकर शरद पवार ने सरकार को घेरा
गाजा युद्धविराम प्रस्ताव पर भारत के यूएन में मतदान से दूर रहने को लेकर सियासी हलचल तेज़ हो गई है। इस मुद्दे पर एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार ने केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा है। दरसल
14 जून को संयुक्त राष्ट्र महासभा में गाज़ा में “तत्काल, बिना शर्त और स्थायी युद्धविराम” की मांग वाला प्रस्ताव रखा गया था। इस प्रस्ताव के पक्ष में 149 देशों ने मतदान किया, लेकिन भारत समेत 19 देशों ने वोटिंग से दूरी बनाई। भारत सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि प्रस्ताव में हमास के 7 अक्टूबर 2023 के आतंकी हमलों की कोई सीधी निंदा नहीं थी — जबकि उन हमलों में 1,200 से अधिक इज़रायली मारे गए थे और सैकड़ों बंधक बनाए गए थे। सरकार के इस कदम पर विपक्ष लगातार सरकार के इस फैसले से असहमत है और कई सवाल खड़े कर रहा है अब इसी कड़ी में
एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार ने रविवार को भारत के गाजा संघर्ष विराम मसौदा प्रस्ताव पर मतदान से दूर रहने को लेकर बड़ा बयान दिया. मुंबई में एक कार्यक्रम में कहा कि चाहे इंदिरा गांधी का युग रहा हो या नेहरू का या उसके बाद का दौर, हमेशा भारत की छवि इस मुद्दे पर एक अलग रुख अपनाने और मानवता की रक्षा करने वाले के रूप में रही है. कल (शनिवार) ही संयुक्त राष्ट्र में इस विषय पर प्रस्ताव रखा गया और जब कट्टरपंथियों के खिलाफ स्टैंड लेना जरूरी था, तब भारत ने तटस्थता स्वीकार की.उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से आज देश का नेतृत्व जिनके हाथ में है, वो ऐसे मुद्दों पर देश की स्पष्ट नीति दुनिया के सामने नहीं रखते और इसके कारण दुनिया के एक बड़े वर्ग के मन में भारत के बारे में गलतफहमी पैदा हो रही है और होती रहेगी.
ग्लोबल स्तर पर देश के बारे में भ्रम की स्थिति पैदा होगी- शरद पवार
शरद पवार ने कहा कि गाजा संघर्ष विराम मसौदा प्रस्ताव पर मतदान से दूर रहने का भारत का फैसला उसकी विदेश नीति के मुताबिक नहीं है. इससे ग्लोबल स्तर पर देश के बारे में भ्रम की स्थिति पैदा होगी. भारत ने UN में गाजा में 'तत्काल, बिना शर्त और स्थायी' युद्ध विराम की मांग करने वाले प्रस्ताव पर मतदान से खुद को दूर रखा है.विपक्ष सरकार के इस फैसले को नैतिक और कूटनीतिक चूक बता रहे है सरकार के इस फैसले पर लगातार सवाल खड़े कर रहा है